डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का एसीबी को अल्टीमेटम: घूस ली है तो गिरफ्तार करो

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा

 नकली बीज घूस कांड पर राजस्थान की राजनीति में मचा भूचाल | राजस्थान की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया जब प्रदेश के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक को एक तीखा पत्र लिखकर सीधे चुनौती दे दी। कथित “नकली बीज घूस कांड” को लेकर उठ रहे सवालों और विपक्ष के आरोपों के बीच डॉ. मीणा ने एसीबी से स्पष्ट जवाब मांगा है।

मंत्री ने अपने पत्र में कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों में जरा भी सच्चाई है तो एसीबी उन्हें तत्काल गिरफ्तार करे। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

 क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत 10 जून 2026 को प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट से हुई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नकली बीज प्रकरण से जुड़ी एफआईआर में सतीश कुमार के साथ एक “डॉक्टर” और “मंत्री” का भी अप्रत्यक्ष उल्लेख है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जुगल नामक व्यक्ति ने बयान दिया कि एक अधिकारी ने 20 लाख रुपये अपने पास रख लिए। इस खबर के सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार और मंत्री पर हमला बोलने का मौका मिल गया।

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विपक्ष ने लगाए गंभीर आरोप

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग से जुड़े कुछ लोग मंत्री के नाम पर धन उगाही कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि छापेमारी और कार्रवाई की आड़ में कथित रूप से “सेटिंग” का खेल चल रहा है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश चौधरी ने भी मामले में मंत्री की कथित भूमिका और मिलीभगत को लेकर सवाल उठाए।

 डॉ.किरोड़ी लाल मीणा का पलटवार

विपक्ष के आरोपों के बीच डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए सुनियोजित राजनीतिक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने एसीबी की निष्पक्षता और गोपनीयता पर भी सवाल उठाए।

मंत्री ने दावा किया कि संबंधित एफआईआर 9 जून 2026 को दोपहर 1:30 बजे एसीबी की वेबसाइट पर अपलोड की गई थी, लेकिन उससे पहले ही एफआईआर से जुड़े कथित गोपनीय तथ्य मीडिया तक कैसे पहुंच गए, यह जांच का विषय है।

एफआईआर लीक होने पर उठाए सवाल

डॉ. मीणा ने अपने पत्र में एफआईआर की जानकारी सार्वजनिक होने से पहले मीडिया में पहुंचने को गंभीर प्रशासनिक चूक बताया है। उन्होंने इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी ने जानबूझकर जानकारी लीक की है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उनका कहना है कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र का भी मामला हो सकता है, जिसका उद्देश्य उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है।

अब एसीबी और सरकार पर नजर

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के इस पत्र ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें एसीबी और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं। विपक्ष जहां मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, वहीं मंत्री अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में बड़ा चुनावी और सियासी विषय बन सकता है। फिलहाल एसीबी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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